

रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत
मौदहा हमीरपुर। ट्रैक्टर ट्राली में यात्रा के दौरान होने वाले हादसों से पुलिस और यातायात पुलिस सबक नहीं ले रही है जिसके चलते एक बार फिर बडे हादसे की आहट सुनाई देने लगी है।
ज़िले में इन दिनों गांव-गांव में मेलों का दौर चल रहा है। लेकिन मेला देखने की उत्सुकता लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर सफर कर रहे हैं।

यातायात पुलिस किसी बडे हादसे के इंतजार में
सरकार द्वारा ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवारी ढोने पर सख्त रोक लगाए जाने के बावजूद, मौदहा क्षेत्र में मुख्य मार्गो पर ऐसी कई तस्वीरें कैमरे में कैद हुई हैं, जहां मेले में जाने वाले लोग ट्रैक्टरों में बैठे दिखाई दे रहे हैं। यह वही मार्ग हैं जिन पर कई हादसे हुए हैं और लगातार हो रहे हैं ।
सवाल यह है कि क्या ट्रैफिक पुलिस को यह ट्रैक्टर सवारियां भरकर दौड़ते दिखाई नहीं दे रहे हैं, या फिर पुलिस किसी बड़े हादसे के इंतज़ार में है?
यातायात नियमों के मुताबिक, ट्रैक्टर केवल कृषि कार्यों के लिए मान्य हैं — लेकिन हमीरपुर में इन दिनों इनका इस्तेमाल खुलेआम सार्वजनिक सवारी ढोने में किया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे वाहन चालकों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि किसी अनहोनी से पहले ही सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।बताते चलें कि बीते सप्ताह जिला मुख्यालय के शीतलपुर के पास ट्रैक्टर ट्राली पलटने से डेढ दर्जन लोग घायल हुए थे जबकि मौदहा कोतवाली क्षेत्र के सिजवाही निवासी एक बच्चे का मुण्डन कराने गए थे और ट्रैक्टर ट्राली पलटने से दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे वहीं बीते साल भगत बाबा का मेला देखने जाते समय कपसा रोड पर ट्रैक्टर ट्राली पलटने से दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। हालांकि एक बार फिर किसी बडे हादसे की आहट सुनाई देने लगी है।
